कोर्ट मैरिज में कोर्ट तो सिर्फ नाम का ही है। शादी तो आपको पहले ही करनी पड़ती है। ये जरूर है कि शादी के बाद आप अपनी शादी का कोर्ट में पंजीकरण कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।अब बात करते है कि शादी कैसे करें?
आप किसी आर्य समाज मंदिर में शादी करके वहाँ से प्रमाण पत्र ले सकते है इसके लिए निम्न चीज़ो की जरूरत होती है:
1 पासपोर्ट आकार के फ़ोटो 5 लड़की के और 5 फ़ोटो लड़के के2. दोनों का एक एक पहचान पत्र तथा एक एक आवास प्रमाण पत्र।
3 एक एक शपथ पत्र लड़के और लड़की की तरह से होता है।
4. दो गवाह एक लड़के की तरफ से और एक लड़की की तरफ से।
पंडित की जिम्मेदारी मंदिर पूरी कर देता है और इसके साथ मंदिर भी फीस लेता है। मंदिर में ही दूल्हे को टोपी और दुल्हन को लाल चुनरी मिल जाती है
मिठाई का डिब्बा ले जाना मत भूलिए और दो फूलों की मालाएँ भी जरूरी होती है। वह आपकी शादी होगी और एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
2- किसी पंजिकृत पंडित से संपर्क कर उससे शादी करवा सकते हैं। आपकी शादी के फोटोग्राफी होनी चाहिए। शादी के बाद पंडित एक प्रमाण पत्र बना कर देता है जिसे उपरोक्त दस्तावेजों के साथ संलग्न करके आपकी नगर समिति या निगम से शादी का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है
ये दोनों रास्ते सबसे आसान है परन्तु हिन्दू धर्म में ही मान्य है। किसी और धर्म मे शादी करने के लिए कोर्ट में उपरोक्त दस्तावेजों के साथ आवेदन करना पड़ता है।कोर्ट एक महीने का समय देता है और माता पिता से भी संपर्क करता है । कोर्ट में स्पेशल मैरिज का भी प्रावधान है।
शादी के लिए लड़के और लड़की को बालिग होना जरूरी होता है। लड़के की आयु 21 वर्ष तथा लड़की की आयु 18 वर्ष होने पर ही उन्हें बालिग माना जाता है। यह पहली शर्त है इसके पूरे न होने की स्थिति में शादी वैध नही मानी जाती है तथा लड़के पर बहलाफुसला कर भगा ले जाने का मुकदमा चलाया जाता है। ऐसी किसी शादी के बाद यदि पति पत्नी में कोई शारीरिक संबंध बनते हैं तो लड़की के घर वाले अपनी लड़की पर दबाव बना कर लड़के पे बलात्कार का आरोप भी बना सकते हैं। अतः लड़की से पहले अच्छे से बात कर लेना चाहिए।
शादी करने वालो को सुभकामनाएँ।धन्यवाद।

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